Blog Details- Shri Ganga Jyotish

कैसे करें पितरों को प्रसन्न, जानिए श्राद्ध करने की सरल विधि एवं श्राद्ध तिथियाँ
30 / Aug / 2020

कैसे करें पितरों को प्रसन्न, जानिए श्राद्ध करने की सरल विधि एवं श्राद्ध तिथियाँ

 

शास्त्र कहते हैं कि 'पुन्नाम नरकात् त्रायते इति पुत्रः; अर्थात- जो नरक से त्राण ( रक्षा ) करता है वही पुत्र है। श्राद्ध कर्म के द्वारा ही पुत्र जीवन में पितृ ऋण से मुक्त हो सकता है इसीलिए शास्त्रों में श्राद्ध करने की अनिवार्यता कही गई है। जीव मोहवश इस जीवन में पाप-पुण्य दोनों कृत्य करता है। पुण्य का फल स्वर्ग है और पाप का नर्क। नर्क में पापी को घोर यातनाएं भोगनी पड़ती हैं और स्वर्ग में जीव सानंद रहता है। जन्म-जन्मांतर में अपने किये हुए शुभाशुभ कर्मफल के अनुसार स्वर्ग-नरक का सुख भोगने के बाद जीवात्मा पुनः चौरासी लाख योनियों की यात्रा पर निकल पडती है अतः पुत्र-पौत्रादि का यह कर्तव्य होता है कि वे अपने माता-पिता तथा पूर्वजों के निमित्त श्रद्धा पूर्वक ऐसे शास्त्रोक्त कर्म करें जिससे उन मृत प्राणियों को परलोक अथवा अन्य लोक में भी सुख प्राप्त हो सके। शास्त्रों में मृत्यु बाद और्ध्वदैहिक संस्कार, पिण्डदान, तर्पण, श्राद्ध, एकादशाह, सपिण्डीकरण, अशौचादि निर्णय, कर्मविपाक आदि के द्वारा पापों के विधान का प्रायश्चित कहा गया है।

 

श्राद्ध कैसे करें :-
श्राद्ध करने की सरल विधि है कि जिस दिन आप के घर श्राद्ध तिथि हो उस दिन सूर्योदय से लेकर 12 बजकर 24 मिनट की अवधि के मध्य ही अपने पितरों के निमित्त श्राद्ध-तर्पण आदि करें। प्रयास करें कि इसके पहले ही ब्राह्मण से तर्पण आदि करा लें। श्राद्ध करने में दूध, गंगाजल, मधु, वस्त्र, कुश, तिल अभिजित मुहूर्त मुख्य रूप से अनिवार्य तो है ही तुलसीदल से भी पिंडदान करने से पितर पूर्णरूप से तृप्त होकर कर्ता को आशीर्वाद देते हैं। तर्पण के समय सर्वप्रथम निमंत्रित ब्राह्मण का पैर धोना चाहिए। इस कार्य के समय पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए। जिस दिन आपको पितरों का श्राद्धल करना हो उस तिथि के दिन तेल लगाने, दूसरे का अन्न खाने, और स्त्री प्रसंग से परहेज करना चाहिए।

 

श्राद्ध में इन भोज्य पदार्थों से करें परहेज :-
श्राद्ध में राजमा, मसूर, अरहर, गाजर, कुम्हड़ा, गोल लौकी, बैगन, शलजम, हींग, प्याज-लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली, कैंथ, महुआ और चना ये सब वस्तुएं श्राद्ध में वर्जित हैं। गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक इन्हें महादान कहा गया है। भगवान विष्णु के पसीने से तिल और रोम से कुश की उत्पत्ति हुई है अतः इनका प्रयोग श्राद्ध कर्म में अति आवश्यक है।

 

ब्राह्मण भोजन से पहले इन्हें भोजन कराएं :-
श्राद्ध कर्म के दिन ब्राह्मण को भोजन कराने से पहले पंचबलि गाय, कुत्ते, कौए, देवतादि और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें ।
गोबलि- गाय के लिए पत्तेपर 'गोभ्ये नमः' मंत्र पढकर भोजन सामग्री निकालें।
श्वानबलि- कुत्ते के लिए भी 'द्वौ श्वानौ' नमः मंत्र पढकर भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें ।
काकबलि- कौए के लिए 'वायसेभ्यो' नमः' मंत्र पढकर पत्ते पर भोजन सामग्री निकालें ।
देवादिबलि- देवताओं के लिए 'देवादिभ्यो नमः' मंत्र पढकर और चींटियों के लिए 'पिपीलिकादिभ्यो नमः' मंत्र पढकर चींटियों के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।

 

इसके बाद भोजन के लिए थाली अथवा पत्ते पर ब्राह्मण हेतु भोजन परोसें। दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके कुश, तिल और जल लेकर हथेली में स्थित पितृ तीर्थ से संकल्प करें तथा एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं। भोजन के उपरांत यथा शक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें तथा निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। यही सरल उपाय है जो श्रद्धा पूर्वक करने से पितरों को तृप्त कर देगा और आपके पितृ आशीर्वाद देने के लिए विवश हो जायेंगे जिससे आपके कार्य व्यापार, शिक्षा अथवा वंश बृद्धि में आ रही रुकावटें भीदूर हो जायेंगी ।

 

श्राद्ध करने का समय - अपरान्ह काल का समय (दोपहर 01:38 से 04:05 बजे तक)

 

01 सितंबर 2020 :- प्रौष्ठपदी श्राद्ध
02 सितंबर 2020 :- प्रतिपदा का श्राद्ध, पितृपपक्ष व महालय प्रारम्भ
03 सितंबर 2020 :- द्वितीया का श्राद्ध

05 सितंबर 2020 :- तृतीया का श्राद्ध

06 सितंबर 2020 :- चतुर्थी का श्राद्ध

07 सितंबर 2020 :- पंचमी का श्राद्ध, भरणी नक्षत्र का श्राद्ध

08 सितंबर 2020 :- षष्ठी का श्राद्ध, कृत्तिका नक्षत्र का श्राद्ध

09 सितम्बर 2020 :- सप्तमी का श्राद्ध

10 सितम्बर 2020 :- अष्टमी का श्राद्ध

11 सितम्बर 2020  :- नवमी का श्राद्ध, अविधवा नवमी, सौभाग्यवती मृतकाओं का श्राद्ध (ऐसी सुहागन स्त्रियां, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो)

12 सितम्बर 2020 :- दशमी का श्राद्ध

13 सितम्बर 2020 :- एकादशी का श्राद्ध

14 सितम्बर 2020 :- द्वादशी का श्राद्ध, सन्यासियों का श्राद्ध

15 सितम्बर 2020  :- त्रयोदशी का श्राद्ध, मघा नक्षत्र का श्राद्ध

16 सितम्बर 2020 :- चतुर्दशी का श्राद्ध, विष-शास्त्रादि से मृतकों का श्राद्ध

17 सितम्बर 2020 :- सर्वपितृ श्राद्ध व अमावस्या व पूर्णिमा श्राद्ध (वे सभी जातक जिनकी मृत्यु तिथि का हमें ज्ञान नहीं है, उन सभी का श्राद्ध इस दिन कर सकते है)