
Navratri 2020 : शारदीय नवरात्रि
कल से नवरात्रि प्रारंभ, जानें कलश स्थापना मुहूर्त एवं अन्य विशेष जानकारी
Shardiya Navratri 2020: शनिवार को नवरात्रि शुरू हो रही है। आज 16 अक्टूबर तक मलमास है और 17 अक्टूबर से घटस्थापना के साथ देवी के 9 दिनों की नवरात्रि यानी दुर्गा पूजा का शुभारंभ हो जाएगा। हर साल नवरात्रि के साथ एक नए जोश का आगाज माना जाता है क्योंकि उसके बाद से एक के बाद एक त्योहारों का अम्बार लग जाता है। हालांकि इस बार कोरोना का प्रभाव जो हिन्दुस्तान में होली के मौके से दिखना शुरू हुआ था, अब दिवाली तक कामय है, इसीलिए सभी गाइडलाइन्स का पालन करते हुए नवरात्रि मनाएं।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त :-
नवरात्रि का पर्व आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से है। नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
1. प्रात: 6 बजकर 23 मिनट से प्रात: 10 बजकर 12 मिनट तक है।
2. वृश्चिक लग्न प्रातः 08:48 से 11:06 तक
3. अभिजित प्रातः11:36 से 12:24 तक
कब से शुरू होगी नवरात्रि, जानें तिथियां :-
7 अक्टूबर 2020 (शनिवार)- प्रतिपदा घटस्थापना
18 अक्टूबर 2020 (रविवार)- द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर 2020 (सोमवार)- तृतीय माँ चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर 2020 (मंगलवार)- चतुर्थी माँ कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर 2020 (बुधवार)- पंचमी माँ स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर 2020 (गुरुवार)- षष्ठी माँ कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर 2020 (शुक्रवार)- सप्तमी माँ कालरात्रि पूजा
24 अक्टूबर 2020 (शनिवार)- अष्टमी माँ महागौरी, दुर्गा महा नवमी, पूजा दुर्गा, महा अष्टमी पूजा
25 अक्टूबर 2020 (रविवार)- नवमी मां सिद्धिदात्री, नवरात्रि पारणा, विजयादशमी
26 अक्टूबर 2020 (सोमवार)- दुर्गा विसर्जन
मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी :-
शनिवार के दिन नवरात्रि का पहला दिन होने के कारण इस दिन मां दुर्गा घोड़े की सवारी करते हुए पृथ्वी पर आएंगी। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि शुरू हो जाती है। साथ ही विभिन्न पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर मां शक्ति की आराधना की जाती है। नवरात्रि पर मां दुर्गा के धरती पर आगमन का विशेष महत्व होता है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा का आगमन भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत के रूप में भी देखा जाता है। हर वर्ष नवरात्रि में देवी दुर्गा का आगमन अलग-अलग वाहनों में सवार होकर आती हैं और उसका अलग-अलग महत्व होता है। शारदीय नवरात्रि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक मनायी जाती है। शरद ऋतु में आगमन के कारण ही इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है।
आरंभ हो जाएंगे शुभ कार्य :-
नवरात्रि का पर्व आरंभ होते ही शुभ कार्यों की भी शुरूआत हो जाएगी। मलमास में शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है। मलमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं, लेकिन नवरात्रि आरंभ होते ही नई वस्तुओं की खरीद, मुंडन कार्य, ग्रह प्रवेश जैसे शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे। शादी-विवाह देवउठनी एकादशी तिथि के बाद ही आरंभ होंगे। नवरात्रि में देरी के कारण इस बार दीपावली 14 नवंबर को मनाई जाएगी।